- नवदीक्षित साध्वी ने अपने सप्तदिवसीय अनुभवों को दी अभिव्यक्ति
- प्रमाणिकता जीवन की अनमोल पूंजी : आचार्यश्री महाश्रमण
- गुरुदर्शन करने वाले चारित्रात्माओं ने व्यक्त किए हृदयोद्गार, प्राप्त किया शुभाशीर्वाद
17.03.2023, शुक्रवार, शाहीबाग, अहमदाबाद (गुजरात)। शाहीबाग प्रवास के दूसरे दिन शुक्रवार को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता की मंगल सन्निधि में पूरे दिन श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता रहा। प्रातःकालीन मंगलपाठ हो, निकट दर्शन-सेवा का लाभ हो अथवा मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में प्रेरणा पाथेय प्राप्ति का समय हो, श्रद्धालु हर समय श्रद्धालु जुटे हुए थे।
प्लेटिनम हाईट्स के पास बने जैनं जयतु शासनम् समवसरण में शुक्रवार को आचार्यश्री ने जहां नवदीक्षित साध्वी राहतप्रभाजी को बड़ी दीक्षा (छेदोपस्थापनीय चारित्र) प्रदान की। वहीं श्रद्धालुओं को पावन पाथेय प्रदान किया। साथ ही अष्टदिवसीय प्रेक्षाध्यान शिविर के समापन के अवसर पर उपस्थित शिविरार्थियों को भी पावन आशीर्वाद और मंगल मार्गदर्शन प्रदान किया। अहमदाबाद में प्रवेश के उपरान्त दर्शन करने वाले चारित्रात्माओं ने भी आज गुरु सन्निधि से प्राप्त हर्षित भावों को अभिव्यक्ति दी तो आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीष से अच्छादित किया।
आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी व साध्वीप्रमुखा साध्वी विश्रुतविभाजी ने श्रद्धालुओं को उद्बोधित किया। तदुपरान्त आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि जैन आगम में 18 पाप प्रवृत्तियां बताई गई हैं, जो पाप का बंध कराने वाली होती हैं। आदमी को इनसे बचने का प्रयास करना चाहिए। पाप से बचने का भय या डर भी पापभिरूता होती है तो आदमी को पापों से बचाती है, वह आदमी के जीवन में होनी चाहिए। जीवन में ईमानदारी की भावना पुष्ट रहे तो जीवन अच्छा हो सकता है। जीवन में ईमानदारी और प्रमाणिकता जितनी मात्रा में होगी, वह जीवन की अमूल्य पूंजी के समान होगी।
आचार्यश्री के इंगितानुसार नवदीक्षित साध्वी राहतप्रभाजी ने अपने सप्तदिवसीय नवजीवन के अनुभवों को अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए उन्हें बड़ी दीक्षा प्रदान की। आर्षवाणी के उच्चारण के साथ छेदोपस्थापनीय चारित्र में स्थापित किया। नवदीक्षित साध्वीजी ने आचार्यश्री को सविधि वंदन किया। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल प्रेरणा भी प्रदान की।
अहमदाबाद के शाहीबाग प्रवेश के दौरान गुरुदर्शन करने वाले मुनि कुलदीपकुमारजी व मुनि मुकुलकुमारजी ने आचार्यश्री के समक्ष अपने हृदयोद्गार व्यक्त किए। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। इसी प्रकार गुरुदर्शन करने वाली साध्वी सरस्वतीजी, साध्वी ऋद्धिप्रभाजी, साध्वी आत्मप्रभाजी व समणी रोहिणीप्रज्ञाजी ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी और आचार्यश्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
आचार्यश्री के कोबा प्रवास के दिन आरम्भ हुए अष्टदिवसीय प्रेक्षाध्यान शिविर के समापन के संदर्भ में गुरु सन्निधि में शिविरार्थी भी उपस्थित थे। इस शिविर के संयोजक श्री अरविंद संचेती, श्री अशोक बरलोटा व श्वेता डागा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि शिविरार्थियों ने इस दौरान जो भी अर्जन किया है, उसका आगे भी निरंतर प्रयोग करते रहने का प्रयास करना चाहिए।