
बिहार
बिहार में जब से सम्राट चौधरी को भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है तब से प्रदेश के राजनीतिक फिजा में एक अनोखे अफवाह को बल दिया जा रहा है। प्रदेश भाजपा के कुछ लोगों द्वारा सम्राट चौधरी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रतिलिपि बताया जा रहा है। अटकल और अफवाह के आधार पर ये (प्रदेश अध्यक्ष) भी मन मुग्ध हो मुख्यमंत्री बनने का सपना पाल रहे हैं।
लेकिन सम्राट चौधरी के बयानों को सुनने के बाद ऐसा लगता है कि प्रदेश भाजपा ने नित्यानंद राय एवं संजय जयसवाल जैसे सूरमाओं के बाद ‘सूरमा भोपाली’ सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। ये भी बयानबाजी के बल पर ही सत्ता पाने की लालसा पाल रखें हैं।
नीचे एक वीडियो दिया गया है उस वीडियो में बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ‘सूरमा भोपाली’ के अंदाज में बात कर रहे हैं। अपने बयान में ये कह रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष में भी मुख्यमंत्री बनने की क्षमता है। उनका यह बात कोरा बयानबाजी के अलावा और कुछ नहीं है।
लगभग दो दशक से भाजपा बिहार के सत्ता में शामिल रहा है फिर भी विगत विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के नाम का घोषणा करना पड़ा था। नीतीश कुमार के रूप में मुख्यमंत्री को स्वीकृत करने का स्पष्ट अर्थ है कि भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता में मुख्यमंत्री बनने की क्षमता नहीं देखा गया था। मुख्यमंत्री के लायक सबसे अच्छा नीतीश कुमार ही थे। अथवा भारतीय जनता पार्टी ‘आत्मनिर्भर’ नही था।
प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के जितने भी सूरमा हैं किसी ने भी पार्टी को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की दिशा में काम नहीं किया। बयानबाजी एवं सत्ता सुख में सभी संलिप्त रहे। नतीजतन यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तगड़ा प्रभाव रहने के बावजूद भी बिहार भारतीय जनता पार्टी ‘परजीवी’ ही बना हुआ है।हर चुनाव में प्रदेश नेतृत्व के बजाय नरेंद्र मोदी का डंका पीटा जाता है।
दरअसल भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं विधायक भी अन्य पार्टियों के तरह आम जनता की समस्याओं से दूरी बनाए रखा है। परिणाम स्वरूप आम जनता भी इन्हें अपने से दूर रखने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं।
धरातल की इस स्थिति से दूर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनमुग्ध होकर मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। अन्य अध्यक्षों के तरह इन्हें भी संगठन को आत्मनिर्भर बनाने का जवाबदेही मिला है। लेकिन ये संगठन को प्रदेश के घर-घर तक मजबूत बनाने के बजाय अपने खयाली पुलाव पकाने के लिए कोरा बयानबाजी में लगे हुए हैं। ऐसा लगता है कि प्रदेश भाजपा परजीवी ही बना रहेगा।
इनका नजर संगठन पर नहीं है, ये कुर्सी के लिए लालायित है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जैसा बनने के लिए वैसा स्वांग तो रचा जा सकता है लेकिन उस योग साधना का क्या होगा जो प्रदेश की आम जनता के लिए समर्पित है। योगी आदित्यनाथ जी बीते पांच बार से गोरखपुर के सांसद बनते आए हैं लेकिन सम्राट चौधरी राजद और जदयू के दरवाजे से निकाले जाने के बाद भाजपा के विधान परिषद के सदस्य हैं। वैसे इस बात से ‘इतना व्याकुल होने की जरूरत नहीं है’।