नालासोपारा में प्रथम बार महामंडलेश्वर हेमलता शरण सखी के मुखाबिंद से श्रीमद् भागवत शिवशक्ति अर्धनारीश्वर मानवकल्याण महायज्ञ ।।

विश्व हिंदू महासंघ अंतर्गत हिंदू युवा वाहिनी एवं संकल्प प्रतिष्ठान मित्र मंडल के संयुक्त तत्वावधान में नालासोपारा पूर्व में 13 जनवरी से 20 जनवरी तक आयोजित शिवशक्ति अर्धनारीश्वर मानवकल्याण महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में विश्व की द्वितीय किन्नर कथावाचक महामंडलेश्वर हेमलता शरण सखी ने कथा प्रेमियों को सात दिन तक कथा का रसपान करायाl कथावाचक महामंडलेश्वर हेमलता शरण सखी ने उद्धव चरित्र, महारासलीला, रुक्मिणी विवाह आदि का वर्णन कियाl रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुऐ कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया l कथा के मंच पर आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गयाl कथा के साथ-साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किया गयाl

उक्त आयोजन नालासोपारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश दुबे के नेतृत्व में किया गया l सखी ने कहा कि गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की, भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया,अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया l इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया, सभी गोपियां सज-धजकर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईl कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईl स्वयं भगवान भोलेनाथ भी गोपीरूप धारण कर वहाँ पहुँच गए। सभी गोपियों के मन में कृष्ण के नजदीक जाने, उनसे प्रेम करने का भाव तो जागा, लेकिन यह पूरी तरह वासना रहित थाl
इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया, यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई थी, जितनी गोपियां उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए, सोमवार को कथावाचक का जन्मदिन था, इसी दिन उनके द्वारा सौ महायज्ञों का सफल आयोजन भी पूर्ण हुआ इस उपलक्ष्य में उनका प्रयागराज से पधारे श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर संत अविराम दास जी महाराज द्वारा पट्टा-अभिषेक किया गयाl कथा स्थल पर एक स्वागत कक्ष बनाया गया था, जहां सभी कथा प्रेमियों को तिलक लगाया जाता था l तिलक लगाने वाला व्यक्ति बनारस से खासकर बुलाया गया था, जो दो से ढाई हजार तरीके से तिलक लगाता है, जो कथा स्थल पर आकर्षण का केंद्र बना l आयोजन में प्रतिदिन सुबह 8 से दोपहर बजे तक यज्ञशाला में अनुष्ठान और विधिवत यज्ञ किया गया l

यज्ञ में हर रोज आहुति डालने के लिए भक्त पहुंच रहे थे l 13 जनवरी को प्रात: मंडप प्रवेश एवं देवताओं का आवाहन किया गया. इसके बाद अरणी मंथन से अग्नि को प्रकट करके महायज्ञ का शुभारंभ किया गया l ‘परोपकाराय इदम शरीरं’. कार्यक्रम का आयोजन विशुद्ध रूप से मानव कल्याण एवं जगत के सचराचर प्राणियों के कल्याण हेतु किया गया l प्रतिदिन भक्त यज्ञ की परिक्रमा करने आ रहे थे l

कार्यक्रम का सफल संयोजन अमित ओमप्रकाश दुबे ने किया जिसमें आशुतोष अजय रोकडे, अभिजीत अजय रोकडे, गोरखनाथ दुबे, ऋषभ तिवारी, ऋषभ मिश्रा,दीपक माने, वशिष्ट शुक्ला, नकुल खटाटे, रेशु पांडेय, विशेष पाटील, संतोष सोनी, आशिष यादव, कुंदन यादव, केशव सेनापती, अजय रोकडे, रेहमान शेख, बाबू बडगु, हर्ष बडगु, सुमित विश्वकर्मा, विवेक चौधरी, अवधेश उपाध्याय, महेश प्रजापती, पं साहब लाल तिवारी पूर्व प्रदेश संयोजक हिंदू युवा वाहिनी महाराष्ट्र , डॉक्टर पीयूष सिंह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हिंदू युवा वाहिनी महाराष्ट्र, विकास यादव शिव मूर्ति एजुकेशनल ट्रस्ट, अंकित तिवारी, विनीत सिंह, विकाश दीक्षित, रेशु सिंह, सोनू रॉय, रौशन गौतम, विपिन तिवारी, श्रवण सिंह, रिषभ तिवारी ने दिनरात परिश्रम कर उन्हे सहयोग किया।
वसई तालुका, पालघर, मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, वापी, दमन, सिलवास आदि क्षेत्रों के अनेक मान्यवरों ने महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा में उपस्थित होकर परमपिता परमेश्वर एवं कथावाचक महामंडलेश्वर हेमलता शरण सखी का आशीर्वाद प्राप्त किया

 

 

 


 

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