अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद ने संविधान दिवस पर भारतीय संविधान को विविध भारतीय भाषाओं में प्रस्तुत करने के लिए भारत सरकार का और अनुवादकों एवं प्रकाशको का धन्यवाद ज्ञापित किया है, मैथिली या बिहार के अधिकांश भाग और झारखंड और पश्चिमी बंगाल के कुछ क्षेत्र के लोगों की मातृभाषा है।

मैथिली करीब सात करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती है और मैथिली में संविधान को पहले ही स्वर्गीय प्रोफेसर नित्यानंद लाल दास एवं भैरव लाल दास जी ने प्रस्तुत कर दिया था। अब सरकारी सहयोग से यह अधिकृत रूपसे प्रकाशित हुआ है ।
संविधान की मूल भावनाओं का आदर करते हुए सभी भाषाओं में इसे प्रस्तुत करने के इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद में सराहा है और आशा की है कि इसकी ऑडियो बनाकर भारत सरकार का सूचना प्रसारण विभाग विविध भाषाओं में इसे प्रसारित करेगा तो वे लोग भी जो कि पढ़ लिख नहीं सकते हैं किंतु ऐसे लाखों मजदूर भी सफर करते हुए या गांवों में रहते हुए भी जब संविधान को अपनी भाषाओं में सुनेंगे तो अपने अधिकारों के प्रति सचेत होंगे और अपने नागरिकोचित कर्तव्यों को संपादित करेंगे तभी एक श्रेष्ठ भारत का निर्माण होगा जो कि विश्व का जगतगुरु होगा ,डॉक्टर धनाकर ठाकुर संस्थापक अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद एवं नेशनल मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन ने आज संविधान दिवस पर देश की जनता को बधाई देते हुए उक्त संदेश दिया है।