नाशिक में प्रथम बार नौ साध्वियों का मिलन समारोह

नाशिक। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के निर्देशानुसार साध्वी श्री मधुस्मिता जी ठाणा :5 औरंगाबाद से मुंबई की ओर विहार कर रहे है एवं डा. साध्वी श्री पीयूषप्रभाजी ठाणा-4 कानपुर (यूपी) से मुंबई की ओर “विहार कर रहे है। भगवान राम की तपोभूमि नाशिक पर दो सिंघाडो का आध्यात्मिक मिलन हुआ। नाशिक के तेरापंथ समाज के इतिहास में प्रथम बार ऐसा मिलन हुआ है। डा. साधवी श्री पियूषप्रभाजी सहवृति साध्वीवृन्द के साथ साध्वी मधुस्मिताजी की अगवानी मे कुछ दूर पधारे एवं गीत संगान किया। मिलन के इस दृश्य को देखकर नाशिक श्रावक समाज भाव विभोर हो गया। तेरापंथ सभा भवन में आयोजित आध्यात्मिक मिलन समारोह में साध्वी श्रीजी ने नमस्कार महामंत्र से शुभारंभ किया। नाशिक तेरापंथी सभाध्यक्ष शांतिलालजी दुगड ने स्वागत वक्तव्य दिया। आगन्तुक साध्वी श्री. मधुस्मिताजी का स्वागत करते हुए साथी श्री पियूषप्रभाजी ने कहा आज का यह मंगलमय अवसर हार्दिक प्रसन्ता लिए उपस्थित हुआ है। इस महनीय अवसर को देखने के लिए श्रावक समाज लालायित रहता है। हमारे तेरापंथ धर्मसंघ की यह भक्ति की
स्वस्थ परम्परा है जिसमे संघ के प्रति निष्ठा का भाव बढ़ता है और हर्षोल्लास उत्पन्न करता है। नाशिक के श्रावक समाज का यह सौभाग्य है कि यह पुनीत अवसर देखने को मिला है। पांचों ही साध्वियों की विशेषताओं का गुणगान करते हुए साध्वी श्री पियूषप्रभाजी के साथ साध्वी श्री भावनाश्रीजी में, साध्वी श्री सुधाकुमारीजी, साध्वी श्री दीप्तीयशाजी ने गीत का संगान किया। साध्वी श्री भावनाश्रीजी ने भी अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।
साध्वीश्री मधुस्मिताजी ने इस आध्यात्मिक मिलन समारोह मे अपने हर्ष को व्यक्त करते हुए कहा की आज का मिलन विकास का प्रतीक है, प्रकाश का प्रतीक है और उल्लास का प्रतीक है। तेरापंथ धर्मसंघ मे साधु-साध्वियों में एकता का भाव अनूठा है। मिलन का यह मनभावन दृश्य एकता की भावना पुष्ट कर रहा है। श्रावक-श्राविकाओं को भी एक अपूर्व अवसर प्राप्त हुआ है कर्मों की निर्जरा करने का। वर्षो बाद मिले साध्वीवृंद को देख्कर मन आहलाहित है, प्रफुल्लित है। “साध्वी स्वस्थप्रभाजी ने भी अपने विचार व संस्मरण प्रस्तुत किए। साध्वी आत्यशाजी, साध्वी सहजयशाजी, साध्वी मल्लिप्रभाजी मे भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। महिला मंडल से संजना भंडारी,नेहा समदरिया, चन्द्रप्रभा चोपड़ा ठाणा से समागत उपासिका प्रतिभाजी चोपड़ा मे वक्तव्य व गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए साहनी दिप्ति यशाजी ने आगतुक साध्वी से अपनी कर्मभूमि मुंबई में शीघ्र पधारने का निवेदन किया। कार्यक्रम में आंबिवली से डॉ. दिलीप मुणोत, ठाणा से सुभाष हिगड़ आदि श्रद्धालु श्रावकजन उपस्थित थे।

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