
नीट परीक्षा में धांधली का घिनौना सच अब पूरी तरह से नंगा हो चुका है। पुलिस जांच में भाजपा नेता दिनेश बिंवाल की गिरफ्तारी इस बात का खुला सबूत है कि कैसे सत्ता के संरक्षण में शिक्षा माफिया पनप रहे हैं। 30 लाख रुपये में पेपर खरीदकर आगे गिरोहों और अन्य ग्रुप्स में बांटने का यह खेल साबित करता है कि ये मनुवादी और पूंजीपति लोग पैसे के दम पर पूरी सरकारी व्यवस्था को अपनी पुश्तैनी जागीर समझते हैं।

गरीब और बहुजन छात्रों से गद्दारी:
एक तरफ गरीब, दलित, पिछड़े और मजदूर का बच्चा दिन-रात एक करके, भूखा रहकर और कर्ज लेकर डॉक्टर बनने की तैयारी करता है, और दूसरी तरफ ये रसूखदार लोग चंद लाखों रुपयों में उनके हक की सीट खरीद लेते हैं। यह सिर्फ एक पेपर लीक नहीं है, बल्कि बहुजन समाज के होनहार युवाओं को उच्च शिक्षा और बड़े पदों से दूर रखने की एक सोची-समझी ब्राह्मणवादी साजिश है। मेरिट की जगह पैसे से रैंक तय की जा रही है।
राष्ट्रवाद का असली पाखंड:
जो सरकारें ‘राष्ट्रवाद’ और ‘ईमानदारी’ का चोला ओढ़कर 24 घंटे ज्ञान बांटती हैं, आज उन्हीं के नेता देश के युवाओं का भविष्य सरेआम बेचते हुए पकड़े जा रहे हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की लीपापोती और इस पूरे नेक्सस का सीधा कनेक्शन सत्ताधारी दल से जुड़ना यह स्पष्ट करता है कि व्यवस्था अंदर तक सड़ चुकी है। यह बहुजन युवाओं की पीठ में सीधा छुरा घोंपना है।