
बेगूसराय
बिहार में एक से बढ़कर एक अनोखे और नायाब नेता हैं। इनकी बदौलत ही आज प्रदेश की यह दशा है — जहां विकास की बातें तो हवा में उड़ती रहती हैं, लेकिन हकीकत जमीन पर गड्ढों में समा जाती है। इन महानुभावों की फेहरिस्त लंबी है, और इसमें बेगूसराय से भाजपा सांसद तथा केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह का नाम बड़े गर्व के साथ लिया जाता है।
गिरिराज ‘बाबू’ काम से नहीं, बल्कि बयानबाजी की कला से प्रसिद्ध हैं। उनकी विशेषता यह है कि जितना कम काम करते हैं, उतना ज्यादा बोलते हैं। सत्ता में टिके रहने का मंत्र वे इतनी निपुणता से जानते हैं कि उसे देखकर राजनीति के छात्र भी शर्मसार हो जाएं। वे देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के परम भक्त हैं। और जैसा कि कहा जाता है — भगवान को भक्त बड़ा प्यारा होता है — वही सूत्र यहां भी चरितार्थ हो रहा है। चरम भक्ति का यह आशीर्वाद इतना जबरदस्त है कि इनके लिए विकास कार्य, क्षेत्र की समस्याओं का समाधान या बिहार को बदलने की कोई जरूरत ही नहीं रह जाती। बस बयान दे दो, सुर्खियां बन जाएंगी, और काम हो गया।
कल जंतर-मंतर पर राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर गिरिराज सिंह जी ने जो बयान दिया, वह भी उनके इसी अनोखे अंदाज का नमूना है। उन्होंने कहा — “राहुल गांधी पर देशद्रोह का मुकदमा दायर होना चाहिए।”

अब सवाल यह उठता है कि गिरिराज दा (‘दा’ शब्द बेगूसराय जिला में बड़े भाई के अर्थ में नाम के बाद लगाया जाता है।) यह बात किसको सुना रहे हैं? और क्यों सुना रहे हैं? क्या वे सरकार से अनुरोध कर रहे हैं? या आम जनता को उकसा रहे हैं? या फिर यह सिर्फ एक और रोजमर्रा का “बयानबाजी का कोटा” पूरा करने का तरीका है?
देखिए, अगर आपको वाकई लगता है कि राहुल गांधी ने कोई देशद्रोही काम किया है, तो आप केंद्रीय मंत्री हैं न! आपका फर्ज है कि तुरंत पुलिस चौकी में जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराएं। मुकदमा दायर करवाएं। फाइलें आगे बढ़वाएं। लेकिन नहीं, ऐसा क्यों करें? बयान देना तो इतना आसान और आरामदायक है। बोल दिया, टीवी पर छा गए, और अगले दिन नया मुद्दा। राहुल गांधी पर आम आदमी अगर मुकदमा दर्ज करवाने पुलिस चौकी जाएगा तो पुलिस उसे फटकारकर भगा देगी, लेकिन मंत्री जी को तो यह “राष्ट्रीय कर्तव्य” हो जाएगा।
गिरिराज ‘बाबू’! अब इस कोरी बयानबाजी का सिलसिला थोड़ा कम कीजिए। बिहार दिन-ब-दिन बदतर होता जा रहा है। भयदायक अपराध, चरम पर पहुंच चूका भ्रष्टाचार, बाढ़, बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा-स्वास्थ्य की बदहाली — ये सब तो आपके बयानों से नहीं ठीक होंगे। अनोखे और नायाब नेता बनकर इतिहास में जगह बनाने की बजाय, कम से कम अपने क्षेत्र और अपने प्रदेश के लिए कुछ ठोस काम करके भी तो देखिए।
वरना यह अनोखापन तो सिर्फ़ बिहार की दुखद कहानी को और लंबा करने का साधन बनकर रह जाएगा।
बयानबाजी बंद करो, काम शुरू करो — वरना ‘नायाब’ का तमगा भी सिर्फ़ मजाक बनकर रह जाएगा।