RSS को शाखा लगाने के लिए लेनी होगी इजाजत? कर्नाटक में नए बिल से गरमाई सियासत

कर्नाटक

कर्नाटक सरकार का यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पहले ही सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक जगहों पर आरएसएस की गतिविधियों पर रोक की मांग कर चुके हैं. वे कहते रहे हैं कि ऐसी गतिविधियां बच्चों और युवाओं पर नकारात्मक असर डालती हैं और भारत की एकता और संविधान की भावना के खिलाफ जाती हैं.

कर्नाटक सरकार सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर नया कानून लाने की तैयारी में है. राज्य कैबिनेट ने गुरुवार को ‘द कर्नाटक रेगुलेशन ऑफ यूज ऑफ गवर्नमेंट प्रिमाइसेज एंड पब्लिक प्रॉपर्टी बिल, 2026’ लाने पर चर्चा की. प्रस्तावित कानून के तहत किसी भी संगठन को सरकारी स्कूल, कॉलेज, मैदान या दूसरी सार्वजनिक जगह पर कार्यक्रम करने से पहले संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी.

इस कदम को खास तौर पर आरएसएस की सार्वजनिक गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे पहले भी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक मैदानों में आरएसएस की शाखाओं और कार्यक्रमों पर सवाल उठा चुके हैं. प्रस्तावित कानून के जरिए ऐसे किसी भी बिना रजिस्ट्रेशन वाले संगठन पर सरकारी परिसर के इस्तेमाल पर रोक लग जाएगी.

आरएसएस के कार्यक्रमों पर क्यों उठे सवाल?

सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित कानून किसी एक संगठन को सीधे निशाना बनाने के बजाय सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल के लिए एक समान नियम तय करेगा. यानी कोई भी संगठन सरकारी परिसर या सार्वजनिक जमीन पर कार्यक्रम करना चाहता है तो उसे पहले अनुमति लेनी होगी. आरएसएस समेत दूसरे संगठनों पर भी यही नियम लागू होगा.

प्रियांक खड़गे ने पिछले साल तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को चिट्ठी लिखकर सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक जगहों पर आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और सार्वजनिक मैदानों में शाखाएं आयोजित की जाती हैं. वहां नारे लगाए जाते हैं. खड़गे का कहना था कि ऐसी गतिविधियां संविधान की भावना और देश की एकता के खिलाफ हैं.

आरएसएस की रजिस्ट्रेशन को लेकर भी खड़गे उठा चुके हैं सवालयह मामला सिर्फ सार्वजनिक जगहों के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है. खड़गे पिछले कुछ महीनों से आरएसएस के कानूनी दर्जे और रजिस्ट्रेशन को लेकर भी सवाल उठाते रहे हैं. जून में उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को चिट्ठी लिखकर संगठन के कानूनी दर्जे, रजिस्ट्रेशन, पदाधिकारियों, फंडिंग, खर्च और टैक्स से जुड़ी जानकारी मांगी थी.

यह भी पढ़ें: ‘RSS का इस्तेमाल बड़े कैपिटल ने किया, आज वो अडानी का हथियार’, राहुल गांधी का तीखा वारकर्नाटक सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरएसएस की गतिविधियों को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है. सरकार का कहना है कि सार्वजनिक संपत्तियों का इस्तेमाल तय नियमों और अनुमति के आधार पर होना चाहिए, जबकि बीजेपी इसे आरएसएस को निशाना बनाने की कोशिश बता सकती है.

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