
हाल के दिनों में आनंद मोहन के जेल से रिहाई मामले में बढ़े विवाद पर राष्ट्रीय चैनलों पर होने वाले वाद-विवाद को देखने के बाद इस बात का स्पष्ट सबूत मिल रहा है कि आनंद मोहन निर्दोष है। उन्हें उस हत्या के केस में राजनीतिक वैमनस्यता के तहत साजिश रच कर फंसाया गया था।
जिस तरह भीषण दुर्गंध से घर में छुपा कर रखे गए लाश का पता चल जाता है उसी तरह समाचार चैनलों में होने वाले वाद-विवाद से आनंद मोहन के निर्दोष होने का सत्य और तथ्य उजागर होने लगा है।
प्रसिद्ध समाचार चैनलों के डिबेट का दो वीडियो नीचे दिया गया है। एक वीडियो में पत्रकार द्वारा उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक से अतीक अहमद के चरित्र के बारे में पूछा जा रहा है। जवाब के रूप में पूर्व पुलिस महानिदेशक ने बेबाक अंदाज में जन्मकुंडली के साथ उसका आपराधिक चरित्र चित्रण किया है।
दूसरे वीडियो में भी पत्रकार ने बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक से आनंद मोहन के चरित्र (साधू या शैतान) के बारे में पूछा है। जवाब के रुप में पूर्व महानिदेशक इस सवाल को टालते हुए कुछ अलग बातें करने लग जाते हैं। आनंद मोहन के चरित्र चित्रण करने से ये सकुचा रहें हैं। सवाल को टालने एवं चरित्र चित्रण करने से सकुचाने के कई कारण हैं, कुछ विवशताएं है। तत्कालीन पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते ये जानते है कि आनंद मोहन निर्दोष है, उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। आनंद मोहन को अपराधी कहने के लिए इनका अंतर्मन स्वीकार नहीं कर रहा है। आनंद मोहन को अपराधी सिद्ध करने के लिए इनके पास अन्य कोई प्रमाण नही है।
ये यह भी नही बता सकते है कि आनंद मोहन निर्दोष है, उसे साजिश के तहत फंसाया गया है। अगर ये आनंद मोहन के ‘निर्दोष होने’ एवं ‘साजिश के तहत फंसाने’ की बात करेंगे तो खुद फंस जाएंगे, बहुत सारे सवालों से घिर जाएंगे।
दोनों वीडियो को देखने के बाद स्पष्ट सबूत मिल रहा है कि आनंद मोहन निर्दोष है। पत्रकारों के सवाल पर उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बड़े ही बेबाकी के साथ अतीक अहमद को अपराधी बता रहा है जबकि बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक बड़ी चतुराई से सवाल को ही टाल देते हैं। इन्हें अगर सिवान के शहाबुद्दीन के बारे में पूछा जाता तो उसकी पूरी कुंडली लेकर बैठ गए होते। ये सिवान के शहाबुद्दीन और सहरसा के आनंद मोहन को अच्छी तरह से जानते हैं। ये बिहार के वरिष्ठतम अधिकारी रह चूकें है। इनके पास बिहार के सारे बड़े अपराधियों का जानकारी होगा। चूंकि आनंद मोहन का राजनीतिक साजिश के तहत दर्ज किया गया अपराध के अलावा और कुछ नहीं है।
अतीक अहमद एवं शहाबुद्दीन के द्वारा प्रताड़ित किए गए लोग आज मीडिया के सामने खुल कर अपराधियों के विरुद्ध अपने प्रताड़ना की कहानियां सुनाते हैं लेकिन आनंद मोहन के लिए आजतक कोई नही आया है। अतीक अहमद और शहाबुद्दीन के आपराधिक चरित्र को बहुत सारे पुलिस अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है लेकिन आनंद मोहन के लिए कोई पुलिस सामने नही आया है।इन सभी बातों से बहुत ही स्पष्ट होता है कि आनंद मोहन अपराधी नही है।उसे राजनीतिक वैमनस्यता के तहत साजिश रच कर फंसाया गया है।
पूर्व पुलिस महानिदेशक द्वारा चरित्र चित्रण करने से मना करना, रहस्य का द्योतक है। पुलिस चरित्र प्रमाण-पत्र निर्गत करता है। आनंद मोहन के चरित्र पर पूर्व पुलिस महानिदेशक का चुप्पी इस बात का सबूत है कि आनंद मोहन निर्दोष है।