उत्तर प्रदेश में नहीं थम रहा पत्रकारों का उत्पीड़न

राजकुमार गौतम/बस्ती (उत्तर प्रदेश) जून 2019 के आंकड़े को देखा जाए तो लोकसभा में पेश राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक 2013 से अब तक देश में पत्रकारों पर सबसे ज्यादा हमले उत्तर प्रदेश में हुए है, 2013 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर हमले के 67 केस दर्ज हुए हैं, दूसरे नंबर पर 50 मामलों के साथ मध्य प्रदेश और तीसरे स्थान पर 22 हमलों के साथ बिहार है,
अंग्रेजी में कहावत है- पेन इज माइटियर देन स्वॉर्ड यानी कलम तलवार से अधिक शक्तिशाली है. लेकिन उत्तर प्रदेश में कलम से ज्यादा ताकतवर हैं प्रशासन, पुलिस और अपराधी, ये अक्सर पेन की निब तोड़ देते हैं.
उत्तर प्रदेश में सरकार कोई सी भी रही हो, लेकिन पत्रकारों को धमकाने, पीटने और हत्या के मामलों में कोई कमी नहीं आई है, ताजा मामला है यूपी के बस्ती जिले के वाल्टरगंज अंतर्गत गनेशपुर कस्बे का है जहां पर अब्बास नाम के पत्रकार को सोमवार रात लगभग 10:30 बजे 9682483898 नंबरों से फोन करके धमकी दी जाती है और खुद को गोरखपुर मंदिर का महंत धर्मेंद्र सिंह बताते हुए भद्दी भद्दी गालियां और जान से मारने की धमकी दी जाती है और धार्मिक द्वन्दता को उग्र करने की कोशिश भी कर रहा था जिसके खिलाफ दूरभाष के माध्यम से अब्बास खान ने थानाध्यक्ष वाल्टरगंज को सूचित किया तदुपरांत थानाध्यक्ष ने मंगलवार को थाने पर बुलाया|
अब्बास खान के साथ दर्जनभर पत्रकार थाने पर थानाध्यक्ष से इस मुद्दे को लेकर मुलाकात करने के लिए पहुंचे मगर पता चला कि थाना अध्यक्ष मुख्यमंत्री के कार्यक्रम मैं गए हुए हैं दूरभाष के माध्यम से थानाध्यक्ष वाल्टरगंज नारायण लाल श्रीवास्तव से बात हुई उन्होंने कहा कि साइबर सेल में एप्लीकेशन सबमिट करवा दें हम जांच करके कार्रवाई करते हैं। उक्त मामले को लेकर पूरे जिले में के पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त है यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो विधि सम्मत अग्रिम कार्रवाई के लिए पत्रकार संगठन तत्पर होगा।

 

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