Bharat Tiwari Encounter: सरेंडर के बाद भी भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर! इस मामले में क्या हो सकती है सजा?

 

बिहार

Bharat Tiwari Encounter Case: हाल ही में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर के बाद कई कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर यह एनकाउंटर फर्जी पाया जाता है तो इसमें क्या सजा हो सकती है

Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस एनकाउंटर में भरत भूषण तिवारी की मौत से एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. जहां कुछ लोग तिवारी को समाज सेवी बताते हैं वहीं दूसरी तरफ उन पर लगे आपराधिक आरोपों की तरफ इशारा भी किया जा रहा है. यह बहस तब और तेज हो गई जब सवाल उठाए गए कि क्या गोली लगने से पहले उन्होंने सरेंडर कर दिया था? इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर यह साबित हो जाता है कि भरत भूषण तिवारी ने सरेंडर कर दिया था और उसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें गोली मारी तो इस घटना के बाद क्या सजा हो सकती है.

भारतीय कानून के तहत पुलिस अधिकारियों को सिर्फ खास हालात में ही बल इस्तेमाल करने की इजाजत है. यह मुख्य रूप से आत्मरक्षा में या फिर जान को तुरंत खतरे से बचाने के लिए किया जाता है. हालांकि एक बार जब कोई भी व्यक्ति सरेंडर कर देता है, हथियार डाल देता है या अब कोई खतरा नहीं रह जाता तो जानलेवा बल का इस्तेमाल करना कानूनी आधार पर खत्म हो जाता है. अगर सरेंडर करने वाले व्यक्ति को जानबूझकर मार दिया जाता है तो यह वैध पुलिस कार्रवाई के बजाय अपराधिक अपराध हो सकता है.

हत्या के आरोप लग सकते हैं 

अगर जांचकर्ता और अदालतें इस नतीजे पर पहुंचती हैं कि एनकाउंटर फर्जी था और आरोपी ने पहले ही सरेंडर कर दिया था तो मामला भारतीय न्याय संहिता के तहत हत्या से जुड़े प्रावधानों के दायरे में आ सकता है. ऐसे हालात में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को उम्र कैद से लेकर मौत की सजा तक हो सकती है. यह ट्रायल के दौरान साबित हुए तथ्यों और अदालत के आखिरी फैसले पर निर्भर करेगा.

सबूत से छेड़छाड़ के आरोप

इस तरह के एनकाउंटर के मामले में जांचकर्ता अक्सर यह देखते हैं कि क्या घटना को असली गोलीबारी के तौर पर दिखाने के लिए सबूत के साथ छेड़छाड़ की गई थी. अगर पुलिसकर्मी सबूत गढ़ते, तथ्य छिपाते, अहम सबूत नष्ट करते या फिर जांचकर्ताओं को गुमराह करने की कोशिश करते पाए जाते हैं तो उन पर अतिरिक्त आपराधिक आरोप लग सकते हैं. ऐसे अपराधों के लिए कई साल तक की जेल हो सकती है.

गलत रिकॉर्ड बनाने पर अलग सजा हो सकती है 

एनकाउंटर की जांच में एक और गंभीर आरोप जो सामने आ सकता है वह है गलत आधिकारिक रिकार्ड तैयार करना. अगर पुलिस अधिकारी एनकाउंटर को सही ठहरने के लिए केस डायरी, रिपोर्ट या एफआईआर में जान-बूझकर गलत जानकारी देते हैं, तो उन्हें आधिकारिक दस्तावेजों में हेर फेर से जुड़े प्रावधानों के तहत अलग कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर जेल की सजा और विभागीय कार्रवाई हो सकती है.

 

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