सफाले। दुनिया का सबसे कीमती धन है समय इसको जिसने भी शासन किया उसने अपने जीवन को सफल बना लिया| समय को सफल बनाने के लिए हमें अपनी सोच को विशाल रखें , अपने ख्वाबों को हकीकत में बदलने के लिए हमें भीतर मैं एक जुनून जगाना होगा क्योंकि छोटी सोच ओर पांव में पड़ी मोच हमेशा दुखदाई होती है| उमरोली जहां पर मैंने व्यापार किया था और यहीं से मेरे जीवन में एक मोड़ आया| यहां आज मैं आया हूं तो यहां धर्म की उमंग में नए रंग भरते रहे|इन चालीस सालो में यहां बहुत बदलाव हुए हैं|उस समय की उमरोलि मैं और आज की अमरोली मैं बहुत फर्क नज़र आ रहा है | समय को गुजरते वक्त नहीं लगता और इसका उपयोग ही जीवन की साधना है |पुरानी स्मृतियां पुनः ताजा हुई है तो यहां के लोगों में आध्यात्मिक विकास होता रहे|
युवा संत भरत कुमार जी ने कहां – आज मुनि श्री पधारे उमरोलि , मूनीश्री फ़रमाते हे मीठी बोली, संयम लेक़र जला रहे हे क्रमों की होली , जीवन में सजा रहे है अध्यात्मिक रंगोली, बाल संत जयदीप कुमार ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में जुमरमलजी बाफ़ना ,अमृत जी मेहता,आज पूरा अमरोली उतसाहित है आज अपने मुनि श्री को अपने क्षेत्र में, 40 वर्ष बाद पाकर, इस उपलक्ष में पालघर बोइसर मुंबई सूरत आदि क्षेत्रों के,लोग उपस्थित रहे । इस अवसर पर प्यारचंदजी, झूमरमलजी,अमृतजीमेहता,दिलीपजी,जसराज जी, अपने विचार व्यक्त किए।
पदमपुरी के कर्मवीर चालीस वर्ष बाद धर्मवीर बनकर आए अपनी उमरोली कर्म भूमि में समय की कीमत को आंके – मुनि श्री अर्हत कुमार जी