
अमेरिका
जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डाइमन ने अमेरिका से कहा है कि रूसी तेल खरीद पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से पहले भारत की रिफाइनरियों और सप्लाई चेन पर असर समझना जरूरी है. उनका कहना है कि गलत तरीके से लगाई गई पाबंदी भारत के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार, कीमतों और भारत अमेरिका आर्थिक रिश्तों पर भी असर डाल सकती है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी प्रशासन को मिला है. भारत और चीन भी इसकी जद में आ सकते हैं. इसी बीच जेपी मॉर्गन के CEO जेमी डिमोन ने अमेरिका से भारत को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है.और पढ़ें

मुंबई में जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान CNBC-TV18 से बातचीत में डिमोन ने कहा कि अमेरिका को पहले यह समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल किस तरह करती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले लेने से पहले भारत और दुनिया के ऑयल मार्केट पर पड़ने वाले असर को समझना जरूरी है.
डिमोन बोले- तेल पर टैरिफ लगाना सही तरीका नहीं
जेमी डिमोन ने रूसी तेल पर टैरिफ लगाने के तरीके पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि तेल पर किसी तरह का टैरिफ लगाया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, रूस पर दबाव बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बीच अमेरिका को यह देखना चाहिए कि कहीं इसका नुकसान भारत और दुनिया के ऑयल मार्केट को तो नहीं हो रहा.
डिमोन ने कहा कि अगर भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा तो उसे कहीं और से तेल खरीदना पड़ेगा. लेकिन हर तरह का कच्चा तेल एक जैसा नहीं होता.
अलग-अलग रिफाइनरियां खास तरह के क्रूड को प्रोसेस करने के हिसाब से डिजाइन की जाती हैं. ऐसे में रूसी तेल की जगह किसी दूसरे देश से आने वाला क्रूड हर रिफाइनरी के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं है.भारत के लिए रूसी तेल बदलना आसान नहींभारत दुनिया के बड़े क्रूड ऑयल इंपोर्टर्स में शामिल है और रूसी तेल उसकी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा है. डिमोन के मुताबिक, रूसी सप्लाई में किसी तरह की रुकावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगी. इससे इंटरनेशनल ऑयल मार्केट में सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतें बढ़ने का दबाव बन सकता है.
डिमोन ने कहा कि अमेरिका को यूक्रेन की मदद के लिए और कदम उठाने चाहिए, लेकिन रूस के ऊर्जा कारोबार पर कार्रवाई करते समय इसके व्यापक असर को भी ध्यान में रखना चाहिए. उन्होंने अमेरिका और भारत के बीच इस मुद्दे पर बातचीत की जरूरत पर भी जोर दिया.
भारत ने रूसी तेल खरीद को अपनी एनर्जी सिक्योरिटी से जोड़कर इसका बचाव किया है. अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि भारत की एनर्जी पॉलिसी ‘पीपल फर्स्ट’ के नजरिए पर आधारित है. उन्होंने कहा कि भारत के फैसले तेल की उपलब्धता, कीमत, बाजार की हालत और कारोबारी व्यवहार्यता को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं
.भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में ग्लोबल ऑयल मार्केट में कीमत और सप्लाई में बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.अगस्त में 16.5 फीसदी घटा रूसी तेल आयातरॉयटर्स के टैंकर डेटा के मुताबिक, भारत ने अगस्त में करीब 21 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल आयात किया. यह जुलाई के मुकाबले 16.5 फीसदी कम था. अगस्त में भारत के कुल क्रूड इंपोर्ट में रूसी तेल की हिस्सेदारी करीब 47 फीसदी रही.
भारत ने अगस्त में कुल करीब 44.4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जो जुलाई से करीब 8.8 फीसदी कम था. ऐसे में रूसी तेल पर संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा अब भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों के लिए भी अहम हो गया है.डिमोन ने दोनों देशों से रुके हुए ट्रेड एग्रीमेंट को पूरा करने के लिए बातचीत जारी रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि कारोबार के लिए स्थिरता और नियमों में भरोसा बेहद जरूरी है