‘सड़कों पर महिलाएं सुरक्षित नहीं तो बड़ी योजनाओं का क्या फायदा?’ जमुई घटना पर भड़कीं प्रियंका गांधी

 

 

बिहार

बिहार के जमुई में 19 सितंबर को एक नाबालिग छात्रा के साथ सड़क पर बदसलूकी की घटना हुई, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और देशभर में इसे लेकर आक्रोश फैल गया. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केंद्र और राज्य सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि सड़कों पर महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं

बिहार के जमुई जिले में एक नाबालिग छात्रा के साथ हुई बदसलूकी की घटना ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है. यह घटना 19 सितंबर की शाम की है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई. अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इस मामले पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केरल के कलपेट्टा में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे भयानक घटना बताया और कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं.

जमुई मामले पर प्रियंका गांधी ने महिला सुरक्षा पर उठाए सवाल (Photo: PTI)

प्रियंका गांधी ने कहा, “यह भयानक घटना है…महिलाओं के खिलाफ़ अपराध बढ़ रहे हैं और उनके लिए माहौल असुरक्षित हो गया है. यह पहले भी असुरक्षित था, लेकिन अब महिलाओं के प्रति हिंसा और ज़्यादा बढ़ गई है और मुझे लगता है कि अगर हम सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा ही पक्की नहीं कर सकते, तो बड़ी-बड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में बात करने का कोई फ़ायदा नहीं है. तो यह वास्तव में एक ऐसी बात है जिस पर हम सभी को खासकर राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को सोचने की ज़रूरत है. उन्हें इस बात पर विचार करना होगा कि वे यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि महिलाएं सुरक्षित महसूस करें.

क्या है पूरा मामला?

मामले की शुरुआत जमुई लखीसराय मुख्य मार्ग से करीब तीन किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाके में हुई. दसवीं कक्षा की एक छात्रा और उसका एक सहपाठी, दोनों एक ही कोचिंग में पढ़ते थे, कोचिंग से लौटते वक्त स्कूटी पर सवार थे. आरोप है कि रास्ते में कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया, लड़के को अलग कर दिया गया और लड़की को घेरकर उसके साथ बदसलूकी की गई. कुछ लोगों ने बीच बचाव की कोशिश भी की, लेकिन घटना को रुकने में समय लगा.

सबसे बड़ी बात यह है कि दो दिन तक इस मामले की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई थी. जमुई एसपी विश्वजीत दयाल ने खुद माना कि रविवार तक पीड़ित पक्ष की ओर से कोई शिकायत नहीं आई थी. वीडियो वायरल होने के बाद गाड़ी नंबर से पीड़ितों की पहचान हुई, फिर एफआईआर दर्ज हुई और एसडीपीओ दीप्ति मोनाली की अगुवाई में एक विशेष जांच टीम बनाई गई.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए डीजीपी को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.घटना के बाद पीड़िता की पहचान भी सार्वजनिक हो गई, जिसके चलते पुलिस को साइबर थाने में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ अलग से केस दर्ज करना पड़ा. विपक्ष ने इसे बिहार में बिगड़ती कानून व्यवस्था का उदाहरण बताया, जिस पर मंत्री श्रवण कुमार ने इसे छिटपुट घटना कहते हुए सरकार के दुखी होने की बात कही. सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर वीडियो वायरल नहीं होता, तो क्या पुलिस इस मामले में कार्रवाई करती?

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